
वर्षिताप ने वंदन | Varshitap Ne Vandan
Jainam Shah
Stavan
Lyrics of Varshitap Ne Vandan by Stavan.co
अहो! अहो! पासजी! मुज मलिया रे, मारा मनना मनोरथ फलिया…!
तारी मूरति मोहनगारी रे, सहु संघने लागे छे प्यारी रे;
तमने मोही रह्यां सुर नर-नारी… अहो अहो0।।1।।
अलबेली मूरत प्रभु! तारी रे, तारा मुखडा उपर जाउं वारी रे;
नाग-नागणीनी उगारी… अहो अहो0।।2।।
धन्य धन्य देवाधिदेवा रे, सुरलोक करे तारी सेवा रे;
अमने अापो ने शिवपुर मेवा… अहो अहो0।।3।।
तमे शिवरमणीना रसिया रे, जई मुक्तिपुरीमां वसीया रे;
मारा हृदयकमलमां वसिया… अहो अहो0।।4।।
जे कोई पार्श्वतणा गुण गाशे रे, भवोभवनां पातिक जाशे रे;
तेना समकित निर्मल थाशे… अहो अहो0।।5।।
प्रभु त्रेवीशमा जिनराया रे, माता वामादेवीना जाया रे;
अमने दरिशन द्योने दयाला… अहो अहो0।।6।।
हुं तो लळी लळी लागुं पाय रे, मारा उरमां ते हरख न माय रे;
एम ‘माणेकविजय’ गुण गाय… अहो अहो0।।7।।
© Jain Muni
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