
चढ़ता सूरज धीरे धीरे | Chadta Suraj Dhire Dhire
Sharad Jain
Stavan | Bhakti
Lyrics of Chadta Suraj Dhire Dhire by Stavan.co
ऊंचा अंबर थी आवोने प्रभुजी (२)
दर्शन करवाने तरसे आंखडी (२)
रुमजुम- रुमजुम आवोने प्रभुजी (२)
राह जोई ने तरसे आंखडी
दर्शन करवाने तरसे आंखडी
सुरज ने चांदला ना दीवा प्रगटाव्या (२)
टमटमता तारला ने मार्गे बिछाव्या (२)
उभो अधीर हुं तो जोउं रे वातलडी(२)
दर्शन करवाने तरसे आंखडी (२)
ऊंचा अंबर थी…
आवोने नैनो मांथी अमीरस वरसावजो (२)
पापो ने कर्मो मारा भक्ति स्वीकारजो (२)
मुखलडुं जोवा हुं तो थयो रे उतावळो (२)
दर्शन करवाने तरसे आंखडी (२)
ऊंचा अंबर थी…
भक्ति ने भाव थी नमन करता (२)
मस्तक अमारुं तारा चरणो मां धरता (२)
आतुर तुम संग करता वातलडी (२)
दर्शन करवाने तरसे आंखडी (२)
ऊंचा अंबर थी…
© Stavan.co
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