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Paryushanam Hi Sarvasvam

पर्युषणं ही सर्वस्वम् | Paryushanam Hi Sarvasvam

Rishabh Sambhav Jain (RSJ)

Latest | Paryushan | Song

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Lyrics of Paryushanam Hi Sarvasvam by Stavan.co

तपः स्वाध्याय संयुक्तं, क्षमया युक्त जीवनम्

पर्युषणं ही धर्मस्य, पर्युषणं ही सर्वस्वम


है अनादि काल से, ये है अजर अमर

ये समय का चक्र है, ये आठ है पहर (2)

तीन लोग में परम जैन धर्म है, पर्युषणं हि सर्वस्वम एक पर्व है


पर्युषणं तपो रतम, सदा गुणं सदानतं - आत्म शुद्धि प्रदायकम

शमं सुखस्य कारणं, मैत्री भाव धारणं, पर्युषणं हि सर्वस्वम


देव जिनको पूजते, हैं हृदय में सींचते

राग द्वेष जिनके आगे, अपनी आँख मीचते

ये अपार, ये अनंत, जैनो का गर्व है

पर्युषणं हि सर्वस्वम एक पर्व है


पर्युषणं तपो रतम, सदा गुणं सदानतं - आत्म शुद्धि प्रदायकम

शमं सुखस्य कारणं, मैत्री भाव धारणं, पर्युषणं हि सर्वस्वम


खामेमि सव्वे जीवा, सव्वे जीवा खमन्तु में

मित्ती में सव्व भुएसू, वेरम मज्झम न केनई

© Rishabh Sambhav Jain

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