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Manibhadra Veer Stuti (Dharelu Sahu Kaam)

मणिभद्र वीर स्तुति (धारेलु सहु काम) | Manibhadra Veer Stuti (Dharelu Sahu Kaam)

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Lyrics of Manibhadra Veer Stuti (Dharelu Sahu Kaam) by Stavan.co

जद-जद भीड़ पड़ी भगतां में तो,

स्वामीजी रो शरणो, आडो आयो जी ओ ।।

भिक्षू-भिक्षू-भिक्षू म्हारी आत्मा पुकारे

भिक्षु रो म्है साचो परचो पायो जी ओ । (2)


शोभजी श्रावक नै नाथद्वारा जेल में ।

सदेह दसरण देण भिक्षू आया जीओ ।

ऊठतां तड़ाक बेड़यां टूट दूरी पड़गी,

तो देख सारा इचरज पाया जी ओ ।।


स्वामीजी नै सिंवरया जद जोधपुर दरबार में ।

पटवोजी पूरी बाजी लेग्या जी ओ,

रूपांजी रो खोड़ो टूट्यो रावळिया रे रावळै

राजी राजी घर का दीक्षा देग्या जी ओ ।।

धगधगता खीरा बरस्या बीदासर में,

होग्या सै बैहोश संत बाकी जी ओ ।

जयाचार्य तन्मय स्तवना सुणाई,

मुणिन्द मोरा ढाळ आज साखी जी ओ ।।


जब्बलपुर जांवतां चम्पक मुनि नै,

शेर दो बबरची मिलग्या जी ओ ।

भिक्षु-स्वाम भिक्षु-स्वाम नाम सहज्यां निकल्यो,

बीस हाथ शेर दूर टळग्यां जी ओ ।।


स्वामीजी री ओट ली जसोल वाला मानजी,

तो काळियै रो जहर उतरग्यो जी ओ ।

जंतर-मंतर झाड़ा-झपटा सारा उत्तर दे दिया,

पर स्वामीजी रो नाम काम करग्यो जी ओ ।।


बोरावड़ रा ठाकरां पर सेना चढ़ आई,

मघवागणी शरणा सुणाया जी ओ ।

कोट स्यूं उतरती फोजां देखी अणगिणती,

भागता कुचामण पाछा आया जी ओ ।।


एक के अनेक छेक देखल्यो थे परचा,

डूबतां री नाव कांठे आई जी ओ ।

बारे बारे फिरै पड़ी बीच में तिजूरी,

डाकुआं री आंख्यां चुंधियाई जी ओ ।।


रात नै विरात नै एकलो के दोकलो,

जद जद डर भय लागै जी ओ ।

स्वामीजी रो नाम लियां खड़या हुवै रूंगटा,

आतमा मैं पौरुष जागै जी ओ ।।


दीपां रो दुलारो प्यारो हार हिया रो,

संकट मोचन हारो अजमाल्यो जी ओ ।

अपणो जाण वत्सलता स्यूं सावळ बुचकार कर,

चम्पक नै एकरस्यां हियै लगाल्यो जी ओ ।।

© Stavan.co

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